गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

बेकार हुआ ............

बेकार हुआ ............

जिंदगी की बज़्म में हर साज़ बेकार हुआ ।
लगाए जो प्रेम राग हर अहसास बेकार हुआ।।
           खुद को तलाषते रहे जिंदगी की राहों में ।
           तकाज़ा ए उसूल खुदा से था बेकार हुआ ।।
जज़्बाते  रोषनार्इ  से  लिखते  रहे  रोज़ ब रोज़ ।
बज़्म में दीद,न वाह ,न आह मिली सब बेकार हुआ ।।
           दर  खुदा  का  सर  मेरा  मिलते  थे   रोज़ ।
           दुनियादारी से गया न मिला खुदा सब बेकार हुआ।।
सोचा था भूल जाएंगे उस बेवफा को हम ।
रोज़ ही आती रही याद सब बेकार  हुआ ।।
           वफा का  सिला  ही गर मिल जाता हमें ।
           मोहब्बत में खुषनुमा वहम था बेकार हुआ ।।
रहनुमा थे  वो  मुल्को अवाम के ।
बुत चौराहे पे फ़ल्सफा बेकार हुआ ।।
           
                           आलोक मिश्रा

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