बेकार हुआ ............
जिंदगी की बज़्म में हर साज़ बेकार हुआ ।लगाए जो प्रेम राग हर अहसास बेकार हुआ।।
खुद को तलाषते रहे जिंदगी की राहों में ।
तकाज़ा ए उसूल खुदा से था बेकार हुआ ।।
जज़्बाते रोषनार्इ से लिखते रहे रोज़ ब रोज़ ।
बज़्म में दीद,न वाह ,न आह मिली सब बेकार हुआ ।।
दर खुदा का सर मेरा मिलते थे रोज़ ।
दुनियादारी से गया न मिला खुदा सब बेकार हुआ।।
सोचा था भूल जाएंगे उस बेवफा को हम ।
रोज़ ही आती रही याद सब बेकार हुआ ।।
वफा का सिला ही गर मिल जाता हमें ।
मोहब्बत में खुषनुमा वहम था बेकार हुआ ।।
रहनुमा थे वो मुल्को अवाम के ।
बुत चौराहे पे फ़ल्सफा बेकार हुआ ।।
आलोक मिश्रा
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