बुधवार, 11 दिसंबर 2013

बोलो मैने क्या अपराध किया है ...

 बोलो मैने क्या अपराध किया है ...
  तेरे  रक्त  ने  मुझको  सींचा  है ।
  तेरी  कोख  ने मुझको  भींचा  है ।
  तेरे प्रेम की छाया मुझे भी है प्यारी ।
  पर  तेरी  है  ये  कैसी  लाचारी ।
  जो मुझे अजन्मे का क्यों दण्ड दिया है ?
         बोलो मैंने क्या अपराध किया है ...?
 तू मेरी प्यारी - प्यारी महतारी  है ।
ये तेरी शापित अजन्मी बिटिया प्यारी है ।
मैं  तेरे मन  उपवन  को  महकाउंगी ।
खुषबू  बन  सब  पर  छा  जाउंगी ।
पर  तूने  मुझे  क्यों त्याग दिया है  ?
      बोलो मैंने क्या अपराध किया है ...?
तू मेरी मुझ में तेरा  ही अंष है ।
बापू से कहना ये भी तेरा वंष है ।
बचा ले मुझको मैं तेरी हो जाउंगी ।
बैठ तेरे  संग  बन्ना  मं गाउंगी ।
फिर तूने क्यों लाचारी का पैगाम दिया है?
         बोलो मैंने क्या अपराध किया है ...?
तेरा  वजूद  तेरी  मां  का  है ।
तुझ पर एहसान नानी मां का है ।
तू एहसान उतारेगी मैं मुस्काउंगी ।
तेरी गोद में किलकारी भर पाउंगी ।
पर तूने क्यों नानी मां को भुला दिया ?
          बोलो मैंने क्या अपराध किया है ...?

        आलोक मिश्रा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें