रविवार, 9 फ़रवरी 2014

मोहब्बत

                              मोहब्बत
            आजकल  मजनु बहुत ही उदास है । वो खोया-खोया रहता है । रेडि़यो पर बज रहे जुदार्इ के गीत तो उसे रुला ही देते है । उसके यार-दोस्त भी हैरान और परेशान हैं। ये लैला -मजनु का किस्सा कुछ ही दिनों पहले आटा चक्की से प्रारम्भ हुआ । यहां मजनु को लैला मिली ; और लैला को मजनु । बस बातों ही बातों में मोबार्इल नम्बरों का आदान-प्रदान हो गया और साथ ही किस्सा चल निकला । मजनु पुराने जमाने का तो था नहीं जो सैकड़ों बार लैला के घर के चक्कर लगाता ; प्यार- मोहब्बत के वादों से भरे प्रेमपत्र लिखता । वो तो एकदम आधुनिक था उसे तो बस एक एस.एम.एस. अर्थात ''शार्ट में समझ या ''लघु समझ संदेश ही करना था । सेकेंड़ों में ही लैला ने हां में जवाब भेज दिया । अब मजनु पर सतारा के गुटके के साथ ही साथ मोबार्इल के काल और एस.एम.एस. जैसे अतिरिक्त खचोर्ं का बोझ और आ पड़ा । अब अक्सर लैला भी उसके मोबार्इल पर भी बैलेंस ड़लवाने का आग्रह कर देती । मजनु को अपने मोबार्इल के साथ ही साथ लैला के मोबार्इल के बैलेंस की भी चिन्ता करनी पड़ती । फिर वे कभी कभार स्कूल ,कोचिंग और दोस्तों के घर जानें के बहाने मिला करते । ऐसे मौकों पर लैला अपना पूरा मुह ढांक कर ही आया करती । इस अवस्था में उसे उसके घर वालों के लिए पहचानना तो कठिन ही था, अक्सर तो मजनु भी पहचान नहीं पाता । फिर वे यहां-वहां घूमते और एक दूसरे से जीने मरने के वादे किया करते । मजनु को भी मालूम है कि उसे पड़ोस के शहर तक जाना भी भारी पड़ता है लेकिन वो चांद-तारों तक जाकर लैला के लिए तोड़ लाने का दम भरता । लैला को भी मालूम है ऐसा झूठ बोलने की पुरानी परम्परा रही है । वो चांद तारों का करेगी भी क्या सो मजनु से पिक्चर , चाट और सूट जैसी हाथ के मैल से खरीदी जा सकने वाली तुच्छ चीजें ही मांगा करती । मजनु तो ठहरा मजनु........... ,उसकी हर मांग को पूरा करने का हर सम्भव प्रयास करता । 
            इस बीच मजनु अपने ही पिता की जेब पर हाथ साफ करते हुए पकड़ा गया । लानत- मलानत के साथ ही पिता जी ने अपनी जेब की सुरक्षा व्यवस्था बढा दी । बस विश्व अर्थ व्यवस्था की ही तरह मजनु के लिए भी आर्थिक संकट का दौर शुरु हो गया । विदेशी सहायता के नाम पर भी दोस्तों से उधार कब तक मिलता ? मजनु की प्रेम कहानी में अब आर्थिक तंगी के चलते वादों का दम निकलने लगा । उसके लिए चांद-तारे तो क्या चाट लाना भी कठिन होने लगा । लैला के तेवर भी बदलने लगे । वो भी अब मिलने के झूठे वादे करने लगी ।  अब वो जब भी मिलने का वादा करती तो न जाने कहीं गायब ही हो  जाती । ऐसे समय उसका मोबार्इल तो अक्सर ही बंद रहता । मजनु अब र्इश्क की दीवानगी में परेशान सा यहां -वहां घूमता । अरे नहीं ............ मजनु पागल-वागल नहीं हुआ है ; वो तो  बस लैला को खोजने और किसी और के साथ पकड़ पाने के अंदेशे में ही पूरे शहर की खाक छानता रहता है । मजनु को एक दिन पता लग ही गया कि लैला ने अपने नम्बर के साथ ही साथ मजनु भी बदल लिया है । मजनु ने बहुत बक-झक की लेकिन लैला भी तो लैला ही थी । अब वो किसी के साथ कार में जाया करती और बड़े-बड़े होटलों में खाया करती । मजनु निराश-हताश उसे अकेले में भी गालियां दिया करता । 
        अब मजनु बेवफार्इ के गीत ,गज़ल और कविताएं लिखता । गम गलत करता हुआ मधुशालाओं में देखा जाता । एक दिन मधुशाला में उसे उसके जैसा ही एक आदमी मिला । जैसे को तैसा ...............मुलाकातें पैमानों से दोस्ती में बदलती है ...... सो वे दोनों भी दोस्त हो गए । उसने अपना नाम रांझा बताया । उसकी कहानी भी मजनु से कुछ ख़ास अलग न थी । दोनों ठुकराए हुए आशिक थे ,दोनों ही मोहब्बत के मारे थे और दोनों ही अब तक नशे में थे । मजनु ने रांझा से पूछ ही लिया '' मोहब्बत क्या है ? रांझा ने कहा '' मै जो हीर से करता हु वही मोहब्बत है ।  मजनु बोला '' अबे ...... तो मै क्या करता रहा ? रांझा भी तुनक गया '' तेरी तू जान मैने तो मोहब्बत की है ...... बस । मजनु बोला '' लैला और हीर ने जो किया वो क्या है ? रांझा झट से बोला '' बेवफार्इ .....बेवफार्इ । मजनु ने आगे पूछा '' अब वो जो दूसरों के साथ कर रही है वो क्या है ? रांझा को कोर्इ जवाब न सूझा । 
         तभी रोमियो उधर से गुजरा वो पूरी तरह से खुश था और चहक रहा था । रांझा उसे पहले से ही जानता था । उसने उसे भी अपनी टेबल पर ही बुला लिया । रांझा ने रोमियो से पूछा  '' कैसी कट रही है तुम्हारी और जूलियट की आजकल ? रोमियो झटके के साथ बोला '' कौन ...... कौन जूलियट ....? अरे यार ...... वो किस्सा तो पुराना हो गया । उसके बाद तो रीटा,टीना और उर्मिला भी जा चुकी । अब तो रोजी और रोमियो के किस्से आम है । ये किस्सा भी कितने दिन चलेगा कहा नहीं जा सकता । रांझा और मजनु हैरान
रह गए '' ये कैसी मोहब्बत है ? दोनों के मुंह से एक साथ ही निकला । रोमियो अदा के साथ बोला '' क्या यार............. तुम लोग उन्हीं पुराने किस्सों  में उलझे हो । पुराना जमाना गया ....... जब मोहब्बत बस एक ही बार होती थी । उस मोहब्बत में दो ही विकल्प होते थे ......... सफल हुए तो शादी और असफल हुए तो मयखाना मिलता था । मोहब्बत का आधुनिक काल तो बहु विकल्प वाला है ; अब तो रोज ही मोहब्बत बदली जा सकती है । मोहब्बत को जितना बांटिए उतना ही बढती है साथ ही इस विचार से हम आधुनिक भी बने रहते है ।  मजनु और रांझा को लगा उन्हें गुरु मिल गया दोनों ने एक साथ ही पूछा '' हमें भी कुछ ज्ञान दें प्रभु । रोमियो ज्ञानियों सी मुद्रा में बोलने लगा '' तुम लोग बेवकूफ हो ....... बोलो हां......तुम अभी भी पुराने जमाने में जीने की कोशिश कर रहे हो । अबे........... अब एक लैला या हीर खोजो तो हजारों मिलती है । ये क्या ..........एक से मिले और इश्क - इश्क करने लगे । खोजो और मजे करो ...........वो भी तो आधुनिक हो गर्इ है न .....। अब मोहब्बत बेवकूफी का नाम है  ........ समझे ........... । अब मजनु और रांझा अपनी नर्इ खोज में लग गए है । उन्हें आधुनिक समय में सफल आशिक जो बनना है ।
                                        आलोक मिश्रा
                                          


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