रविवार, 2 फ़रवरी 2014

यादों की रौनक अभी बाकी है

यादों की रौनक अभी बाकी है
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
        वो  तेरी  महक ए चूड़ीयों  की  खनक  बाकी है ।
        वो तेरे चेहरे की रंगत फुसफुसाती चहक बाकी है ।
        कई  साल  हुए ए गुज़रे चुके  है यादों के जलसे ।
                          वक्तए  के  पैरों  के  निशां  अभी  बाकी  है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
        वो दीवर की ओट से झांकता चेहरा ।
        वो शर्म ओ हया से लाल सा चेहरा ।
                        आईने पे तेरे लबों की लाली अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
        वो दीदार के इंतजार को तरसती आंखे ।
        मिलने पर शर्म से झुकी और मुंदी आंखे
                      मेरे कुर्ते पर तेरे सूरमे के निशां अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
          कमबक्खत वक्ति ने दूर किया था जब हमें ।
          फिर मिला देने का झांसा दिया था जब हमें ।
                               उस बुरे वक्ता की पीर अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
          ये तस्सेबुर कि मिले थे हम कभी ।
          महका जाता है मेरी शामों को आज भी ।
                            तू नही ए तेरी यादों के सहारे अभी बाकी है ।
 कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्तु के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
          वो वादे इरादे ए वो आंसूओं की झड़ी ।
         टूट के बिखरती हुई वो बेनी की लड़ी ।
                            किताबों के सूखे फूलों में महक अभी बाकी है ।
 कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्तु के पैरों के निशां अभी बाकी है ।


1 टिप्पणी: