रविवार, 2 मार्च 2014

                                      कहानी
संदेष
      वो थोड़ी देर मुझे अपलक देखती रही और फिर उठ कर अंदर चली गर्इ । मै जहां बैठा हुं यह एक झुग्गी बस्ती में झोपड़ी है । मै यहां कैसे हुं ? इसकी कहानी दो या तीन वाक्य की ही है । कुछ ही दिनों पहले सुभाष से मेरी मित्रता हुर्इ है । आज अचानक ही सुभाष ने मुझे यहां भेजा है ये बताने के लिए कि उसकी तबियत बहुत खराब है । मंै इसी संदेश के साथ खोजता हुआ यहां पहुचा हुं । मै जिस महिला से मिला, उसने अपना नाम उमा बताया ; सांवली, तीखे नैन-नक्श ,उम्र यही कोर्इ बत्तीस-तैतीस । मैने जैसे ही संदेश दिया वो बोल पड़ी '' हां........हां तबियत खराब है ,अब वो अपनी बीबी के पल्ले में घुसा रहेगा । तबियत खराब ही है तो यहां आकर भी तो सो सकता था ।  मुझे लगा शायद मुझे यहां नहीं आना चाहिए था । वो मुझ से बोली '' अरे........ आप बैठ जाइए न बाबा....... । हा..... तो क्या हुआ सुभाष को ? मेरा दिमाग ''बाबा के विश्लेषण में लगा था और सीधे प्रश्नों के लिए तैयार नहीं था ; मैं चुप ही रहा । वो फिर बोली '' मै आपको कुछ थोड़े ही कह रही हुं .......। पानी पिऐंगे ? मैने हां में सर हिलाया । 
             उमा पानी लेकर आ गर्इ । पानी पीते हुए ध्यान दिया कि ये एक छोटी झोपड़ी है, दो भागों में बंटी हुर्इ ;शायद अंदर चौका और सामान रखने का कमरा हो । उमा ने मेरी निगाहों को पकड़ ही लिया । वो हाथ के इशारे के साथ ही बोल पड़ी '' यही है सुभाष का दिया हुआ महल और मै इसकी रानी हु । मै उठने लगा तो वो पूरे अधिकार के साथ बोली '' आप बैठ जाइए न ..........बाबा । मै वहीं पड़ी खटिया पर बैठ गया । वो भी मेरे पास ही जमीन पर बैठ गर्इ । वो शायद बातों का सिलसिला आगे बढाना चाहती थी । उसने पूछा '' हां .....तो क्या हुआ प्रभात को ? मै धीरे से बोला ''शायद ......शायद बुखार ........... । '' शायद ...... क्या मतलब है .... ? कैसे दोस्त हो ?....... पूरा पता किए बगैर ही आ गए । वो बीच में ही बोल पड़ी । मै फिर उठने की कोशिश करने लगा । वो बोली '' अरे बैठो न ..........बाबा । मै खटिया से आधा ही उठा था फिर बैठ गया । उमा ने प्रश्न बदल दिया '' क्या तुम्हें सुभाष ने मेरे बारे में कुछ बताया ?...... क्या बताया ? मै सोचने लगा क्या बताउ । वो शायद पूछने से अधिक बताना चाहती थी । वो बोले बगैर भी कहा रह सकती थी '' उसने मेरे बारे में तुम्हें बताया तो होगा कि मैं उसकी प्रेमिका हुं .........उसकी पत्नी के अलावा प्यार .....। आप लोग मुझे न जाने किस -किस नाम से पुकारते हो .......।   उसकी अवााज कम होती हुर्इ बंद हुर्इ। वो मेरी आंखों में प्रतिकि्रया देखने का प्रयास करने लगी । उसे कुछ मिला या नहीं मुझे शराब की गंध अवश्य महसूस हुर्इ । मै क्या कहता वो बोले जा रही थी '' आपको संकोच हो रहा है न .....बाबा । उसकी पत्नी वहां हवेली में रहती है ;मै दूसरी हु न तो मेरे लिए ये है झोपड़ा ।  अब मै बीच में बोल पड़ा '' मुझे जाना होगा जल्दी में हु । वो पूरे अधिकार से बोली '' जाना तोे सबको ही है लेकिन मै सुभाष से पहले जाउंगी ।...... हां तो आप को ड़र लग रहा है या शर्म आ रही है । मुझे खुद पर विश्वास है आपको है न तो बैठो न .........बाबा । ड़रने की कोर्इ बात नहीं है । सबसे र्इमानदार और बेबस लोग ऐसी ही बस लोग ऐसी ही जगहों पर रहते है ।   मै कसमसा कर बैठ गया । उसका बोलना जारी था '' अब यहां कोर्इ नहीं आता। पहले-पहल शरीफजादे आते थे  । मैं तो सुभाष को ही चाहती हु न । अब कोर्इ नहीं आता।  मै मन की बात करने को भी तरस जाती हुं । आप आए है तो आ को लगता होगा कि मैं बहुत बोलती हुं मन की बात करने को भी तरस जाती हुंं । मै तो बस मोहल्ले के बच्चों से ही बात करके मन बहला लेती हु।  मैं न चाहते हुए भी बोल ही पड़ा '' और तुम्हारे बच्चे ? वो अपनी ही लय में थी '' मेरे बच्चे ......... नहीं है । होने ही नहीं दिये । मैं तो बस मोहल्ले के बच्चों से ही बातें करके मन बहला लेती हु । मुझ से फिर बोले बगैर नहीं रहा गया '' और सुभाष भी तो रहते होगें ।  उसने बुरा सा मुंह बनाया '' आता है दिन में एक-दो बार । रात को तो वो अपनी बीबी के पल्ले में ही घुसा रहता है । वहीं सोता है । मैं तो अकेली रहती हुं रातों को भी और अपने आप से ही बात करती रहती हुं । रातों को ड़र भी बहुत लगता है। अक्सर ही मैं नशे में खुद से ही बातें करती हुं । अक्सर तो मै बात करने को भी तरसती रहती हुं ।
         फिर वो अपलक मुझे देखने लगी जैसे मेरे भावों को पढ़ने की कोशिश कर रही हो। मेरे निर्विकार चेहरे ने उसे निराश ही किया होगा । वो उठी और अंदर चली गर्इ । अंदर से टीन की संदूक खुलने की आवाज आर्इ और फिर बंद होने की भी । उमा वापस कमरे में आर्इ तो उसके हाथ में मुड़ा हुआ अखबार था । वो मेंरे पास आकर अखबार खोलने लगी । उसमें एक बुजुर्ग आदमी की फोटो थीे ।  उसने फोटो को चूमा , पैर भी छुए और बिना मेंरी ओर देखे कहा '' ये मेरे पापा है । बस अब ये ही मेंरे अकेलेपन में मेरे साथ होते है । मैं अपनी सब बात इन्हें ही बताती हुं ।  मैने युं ही कहा '' बहुत ही अच्छे है ........ कहां है अभी? उसने जवाब दिया '' थे । मै बोला '' याने ....... अब नहीं हैं। उमा बोली '' नहीं...... वे मुझे बहुत प्यार करते थे और मै सुभाष को । मै सुभाष की राधा ,मीरा और गोपी थी । मै इसके साथ भाग आर्इ । मेरे पिता मेरे आने के चौथे दिन ही मर गए । वो मरे नहीं मैने  उन्हें मार ड़ाला । मै दोषी हुं उनकी मौत की । उन्होंने मरते समय मुझे श्राप दिया होगा तभी तो मै आज अकेलापन झेलने को मजबूर हुं । मुझे यह भी लगता है कि पापा मुझे श्राप नहीं दे सकते । ये तो मेरी ही करनी का फल है जो मै भोग रही हुं । मुझे लगता है मुझ जैसी बेटी भगवान किसी बाप को न दे ।  शायद कोर्इ और होता तो इसे बहाना,झूठ और फरेब का तरीका ही समझता लेकिन मुझे उसकी आंखों के कोर पर आंसुओं की सच्चार्इ ही दिखार्इ दी अचानक ही अपने अतीत से बाहर आ गर्इ और बोली '' मै भी कहां आपको बोर करने लगी । अच्छा अब आप जाइए .........बाबा । मै और मेरे पापा अकेले में आपस में बातें करेंगे । मै झोपड़ी से निकला तो आस-पास के लोगों ने मुझे अजीब सी नजरों से देखा । मै गया तो था संदेश देने मगर अपने साथ एक संदेश लेकर भी जा रहा हुं ।
                                             आलोक मिश्रा 
                                               

मंगलवार, 11 फ़रवरी 2014

WASTED ............
Each harness has Bjhm waste of life .
The love song has made ​​everyone feel useless ..
           Are Tlaste themselves in the path of life .
           A reminder was useless to God 's principles ..
Daily by writing to Roshnari Jjhbate Daily .
In Bjhm Did not Wow , did not ah screw it up ..
           I met the head of God daily rate .
           God did not worldliness has been all in vain ..
Disloyal thought that we would be missing .
All waste has been coming every day to remember ..
           We only get Silla of Wafa Gar .
           WASTED illusion Khusnuma was in love ..
Countries, he was director of the people .
Flsfa statue on the square was useless ..
           
                           Alok Mishra

ار ہوا .......بیکار ہوا .....

بیکار ہوا ............
زندگی کی بج़م میں ہر ساز بیکار ہوا .
لگائے جو محبت راگ ہر احساس بیکار ہوا ..
           خود کو تلاشتے رہے زندگی کی راہوں میں .
           تكاذا اے اصول خدا سے تھا بیکار ہوا ..
جج़باتے روشنار سے لکھتے رہے روز بہ روز .
بج़م میں دیدہ ، نہ واہ ، نہ آہ ملی سب بیکار ہوا ..
           شرح خدا کا سر میرا ملتے تھے روز .
           دنياداري سے گیا نہ ملا خدا سب بیکار ہوا ..
سوچا تھا بھول جائیں گے اس بے وفا کو ہم .
روز ہی آتی رہی یاد سب بیکار ہوا ..
           وفا کا صلہ ہی گر مل جاتا ہمیں .
           محبت میں كھشنما وہم تھا بیکار ہوا ..
رہنما تھے وہ ملكو عوام کے .
بت چوراہے پہ فلسپھا بیکار ہوا ..
           
                           آلوک مشرا

रविवार, 9 फ़रवरी 2014

Mohabbat- the love

Mohabbat
            Nowadays Mjnu is very sad . He lost - is lost . Song Judari o'clock on Redihyo give him cry . Her friend - friends are shocked and upset . These Laila - Mjnu flour mill started with the story of a few days ago . Laila got to Mjnu here , and the Mjnu Laila . Just exchanged platonically Mobaril numbers - was provided as well as the story was to come . Mjnu was not so old-fashioned rotating hundreds of times Layla's house ; love - love to write love letters full of promises . She was very modern it just an SMS '' Short '' in the sense that it was to understand the messages short . Sent by Laila in Sekendon yes . As well as tips on Mjnu Mobaril longer period of Satara and SMS Had the additional burden of such expenses . Laila Mobaril her Dlwane now often insist on your balance . Mobaril Mjnu as well as the balance of Laila Mobaril have to worry . Then he occasionally school , a house under the pretext of coaching and to meet friends . Laila was drawn to only cover your whole mouth . At this stage it was difficult to recognize her for her family members , often does not recognize the Mjnu . Then they can - there moving around and living with each other to make them die . Mjnu neighboring town to get to know him , but he also has a huge moon - Laila break to go to the stars fills the effect of bringing . Laila also know it is an old tradition of lying . So Mjnu picture of what he would of stars and the moon , such as licking and suits that can be purchased with dirt on your hands that sought the trivial stuff . Mjnu then paused Mjnu ........... , He does everything possible to satisfy every demand .
            Meanwhile Mjnu wipe out pockets of his own father was arrested . Damn - judgmental about the security of your pocket as well as enhance the Father . Just as in the world economy economic crisis has begun to Mjnu . When foreign aid loans from friends to even get the name ? Mjnu 's love story began in the coming financial crunch own promises . To the moon - the stars seemed to be so hard to get licked . Laila 's attitude began to change . He also started getting false promises . Now they promise to meet you somewhere disappeared when he is not . So often closed his Mobaril time . Risk of addiction Mjnu bit nervous now here - there moves . Damn ............ Mjnu crazy - do not Wagl ; she just find Laila and get hold of with someone pours around the entire city lives in fear . Mjnu know one day we were Laila Mjnu along with their number has changed . Mjnu the very bak - fantastically but was Laila Laila too . She used to go in the car with someone and large - large hotels to eat . Mjnu disappointed - was desperate to vilify him in alone .
        Now Mjnu Bevfari songs, ghazals and writes poems . Seen in bars gum was wrong . One day a guy like him got into the bar . Changes in friendship visits parameters ............... tit for tat ...... So they were friends . He said his name Ranjha . Her story was also not Mjnu differs little . Both were rejected lover , love both were killed and two were still drunk . Mjnu questioned the Ranjha '' What is love ? '' I 've been in the same Heer Ranjha, which is love . '' Abe told Mjnu ...... So what am I ? So you know I love you, too, '' Ranjha has been moody ...... That's it. Mjnu '' Layla and Heer has done what he said ? Ranjha said '' Bevfari ..... Bevfari forthwith . Mjnu She further asked, '' What is she doing with others ? Ranjha not respond to anything the idea.
         The Romans went through when she was perfectly happy and tweet . Ranjha already knew him . He also called on his table . Ranjha asked the Romeo and Juliet '' How are you getting disconnected nowadays? '' Romeo who spoke with shock ...... Who Juliet ....? Oh man ...... It was the old story . Since then, Rita , Tina and Urmila also gone . Rosie and Romeo are common stories now . How long will this story can not be told . Ranjha and shocked Mjnu
'' This is the kind of fell in love ? With two out of the mouth . Romeo '' the man said with pay ............. You become embroiled in the old tales . The old era ....... When love was just once . There were two options that love ......... So the wedding was succeeded and failed to get the alehouse . Love the modern period is multiple choice ; Now love can be changed every day . The Bantia leads to love as much as the idea that we remain modern . Mjnu got to master them both and felt Ranjha asked :'' We also have some knowledge as to the Lord . Romans began to speak in currency wise '' You 're stupid ....... Say Yes ...... you 're still trying to live in the past . Abe ........... Find a lover or Heer joins the thousands . What .......... met the love - love began . Find and enjoy the modern Gri ........... not too ...... Now the name of love is stupid ........ Got ........... . Mjnu and Ranjha took his Nri is now in pursuit . The lover who is to be successful in modern times .
                                        Alok Mishra
                                         
I was singing the dirge tarannum .
He has a message of love ..
       Which ocean is calling everyday enthusiasts .
       Strand by strand made ​​me a river ..
 The world stops moving and his Ishare
 God made ​​the same Khuskhyali Insa ..
      Jlvon Haseeno from the troop is filled .
      Teri has charmed by a Tbssuum ..
 Let not the heart to tell the infidel .
Take the infidel infidel made ​​to us ..
      Stuck - stuck Jihndgi wrote gloves .
      A Tufa every attack made ​​by the poet ..
Tmannaa not realize I was not fetish .
He 's just made ​​me Insa ..
    Alok Mishra

मोहब्बत

                              मोहब्बत
            आजकल  मजनु बहुत ही उदास है । वो खोया-खोया रहता है । रेडि़यो पर बज रहे जुदार्इ के गीत तो उसे रुला ही देते है । उसके यार-दोस्त भी हैरान और परेशान हैं। ये लैला -मजनु का किस्सा कुछ ही दिनों पहले आटा चक्की से प्रारम्भ हुआ । यहां मजनु को लैला मिली ; और लैला को मजनु । बस बातों ही बातों में मोबार्इल नम्बरों का आदान-प्रदान हो गया और साथ ही किस्सा चल निकला । मजनु पुराने जमाने का तो था नहीं जो सैकड़ों बार लैला के घर के चक्कर लगाता ; प्यार- मोहब्बत के वादों से भरे प्रेमपत्र लिखता । वो तो एकदम आधुनिक था उसे तो बस एक एस.एम.एस. अर्थात ''शार्ट में समझ या ''लघु समझ संदेश ही करना था । सेकेंड़ों में ही लैला ने हां में जवाब भेज दिया । अब मजनु पर सतारा के गुटके के साथ ही साथ मोबार्इल के काल और एस.एम.एस. जैसे अतिरिक्त खचोर्ं का बोझ और आ पड़ा । अब अक्सर लैला भी उसके मोबार्इल पर भी बैलेंस ड़लवाने का आग्रह कर देती । मजनु को अपने मोबार्इल के साथ ही साथ लैला के मोबार्इल के बैलेंस की भी चिन्ता करनी पड़ती । फिर वे कभी कभार स्कूल ,कोचिंग और दोस्तों के घर जानें के बहाने मिला करते । ऐसे मौकों पर लैला अपना पूरा मुह ढांक कर ही आया करती । इस अवस्था में उसे उसके घर वालों के लिए पहचानना तो कठिन ही था, अक्सर तो मजनु भी पहचान नहीं पाता । फिर वे यहां-वहां घूमते और एक दूसरे से जीने मरने के वादे किया करते । मजनु को भी मालूम है कि उसे पड़ोस के शहर तक जाना भी भारी पड़ता है लेकिन वो चांद-तारों तक जाकर लैला के लिए तोड़ लाने का दम भरता । लैला को भी मालूम है ऐसा झूठ बोलने की पुरानी परम्परा रही है । वो चांद तारों का करेगी भी क्या सो मजनु से पिक्चर , चाट और सूट जैसी हाथ के मैल से खरीदी जा सकने वाली तुच्छ चीजें ही मांगा करती । मजनु तो ठहरा मजनु........... ,उसकी हर मांग को पूरा करने का हर सम्भव प्रयास करता । 
            इस बीच मजनु अपने ही पिता की जेब पर हाथ साफ करते हुए पकड़ा गया । लानत- मलानत के साथ ही पिता जी ने अपनी जेब की सुरक्षा व्यवस्था बढा दी । बस विश्व अर्थ व्यवस्था की ही तरह मजनु के लिए भी आर्थिक संकट का दौर शुरु हो गया । विदेशी सहायता के नाम पर भी दोस्तों से उधार कब तक मिलता ? मजनु की प्रेम कहानी में अब आर्थिक तंगी के चलते वादों का दम निकलने लगा । उसके लिए चांद-तारे तो क्या चाट लाना भी कठिन होने लगा । लैला के तेवर भी बदलने लगे । वो भी अब मिलने के झूठे वादे करने लगी ।  अब वो जब भी मिलने का वादा करती तो न जाने कहीं गायब ही हो  जाती । ऐसे समय उसका मोबार्इल तो अक्सर ही बंद रहता । मजनु अब र्इश्क की दीवानगी में परेशान सा यहां -वहां घूमता । अरे नहीं ............ मजनु पागल-वागल नहीं हुआ है ; वो तो  बस लैला को खोजने और किसी और के साथ पकड़ पाने के अंदेशे में ही पूरे शहर की खाक छानता रहता है । मजनु को एक दिन पता लग ही गया कि लैला ने अपने नम्बर के साथ ही साथ मजनु भी बदल लिया है । मजनु ने बहुत बक-झक की लेकिन लैला भी तो लैला ही थी । अब वो किसी के साथ कार में जाया करती और बड़े-बड़े होटलों में खाया करती । मजनु निराश-हताश उसे अकेले में भी गालियां दिया करता । 
        अब मजनु बेवफार्इ के गीत ,गज़ल और कविताएं लिखता । गम गलत करता हुआ मधुशालाओं में देखा जाता । एक दिन मधुशाला में उसे उसके जैसा ही एक आदमी मिला । जैसे को तैसा ...............मुलाकातें पैमानों से दोस्ती में बदलती है ...... सो वे दोनों भी दोस्त हो गए । उसने अपना नाम रांझा बताया । उसकी कहानी भी मजनु से कुछ ख़ास अलग न थी । दोनों ठुकराए हुए आशिक थे ,दोनों ही मोहब्बत के मारे थे और दोनों ही अब तक नशे में थे । मजनु ने रांझा से पूछ ही लिया '' मोहब्बत क्या है ? रांझा ने कहा '' मै जो हीर से करता हु वही मोहब्बत है ।  मजनु बोला '' अबे ...... तो मै क्या करता रहा ? रांझा भी तुनक गया '' तेरी तू जान मैने तो मोहब्बत की है ...... बस । मजनु बोला '' लैला और हीर ने जो किया वो क्या है ? रांझा झट से बोला '' बेवफार्इ .....बेवफार्इ । मजनु ने आगे पूछा '' अब वो जो दूसरों के साथ कर रही है वो क्या है ? रांझा को कोर्इ जवाब न सूझा । 
         तभी रोमियो उधर से गुजरा वो पूरी तरह से खुश था और चहक रहा था । रांझा उसे पहले से ही जानता था । उसने उसे भी अपनी टेबल पर ही बुला लिया । रांझा ने रोमियो से पूछा  '' कैसी कट रही है तुम्हारी और जूलियट की आजकल ? रोमियो झटके के साथ बोला '' कौन ...... कौन जूलियट ....? अरे यार ...... वो किस्सा तो पुराना हो गया । उसके बाद तो रीटा,टीना और उर्मिला भी जा चुकी । अब तो रोजी और रोमियो के किस्से आम है । ये किस्सा भी कितने दिन चलेगा कहा नहीं जा सकता । रांझा और मजनु हैरान
रह गए '' ये कैसी मोहब्बत है ? दोनों के मुंह से एक साथ ही निकला । रोमियो अदा के साथ बोला '' क्या यार............. तुम लोग उन्हीं पुराने किस्सों  में उलझे हो । पुराना जमाना गया ....... जब मोहब्बत बस एक ही बार होती थी । उस मोहब्बत में दो ही विकल्प होते थे ......... सफल हुए तो शादी और असफल हुए तो मयखाना मिलता था । मोहब्बत का आधुनिक काल तो बहु विकल्प वाला है ; अब तो रोज ही मोहब्बत बदली जा सकती है । मोहब्बत को जितना बांटिए उतना ही बढती है साथ ही इस विचार से हम आधुनिक भी बने रहते है ।  मजनु और रांझा को लगा उन्हें गुरु मिल गया दोनों ने एक साथ ही पूछा '' हमें भी कुछ ज्ञान दें प्रभु । रोमियो ज्ञानियों सी मुद्रा में बोलने लगा '' तुम लोग बेवकूफ हो ....... बोलो हां......तुम अभी भी पुराने जमाने में जीने की कोशिश कर रहे हो । अबे........... अब एक लैला या हीर खोजो तो हजारों मिलती है । ये क्या ..........एक से मिले और इश्क - इश्क करने लगे । खोजो और मजे करो ...........वो भी तो आधुनिक हो गर्इ है न .....। अब मोहब्बत बेवकूफी का नाम है  ........ समझे ........... । अब मजनु और रांझा अपनी नर्इ खोज में लग गए है । उन्हें आधुनिक समय में सफल आशिक जो बनना है ।
                                        आलोक मिश्रा
                                          


रविवार, 2 फ़रवरी 2014

यादों की रौनक अभी बाकी है

यादों की रौनक अभी बाकी है
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
        वो  तेरी  महक ए चूड़ीयों  की  खनक  बाकी है ।
        वो तेरे चेहरे की रंगत फुसफुसाती चहक बाकी है ।
        कई  साल  हुए ए गुज़रे चुके  है यादों के जलसे ।
                          वक्तए  के  पैरों  के  निशां  अभी  बाकी  है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
        वो दीवर की ओट से झांकता चेहरा ।
        वो शर्म ओ हया से लाल सा चेहरा ।
                        आईने पे तेरे लबों की लाली अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
        वो दीदार के इंतजार को तरसती आंखे ।
        मिलने पर शर्म से झुकी और मुंदी आंखे
                      मेरे कुर्ते पर तेरे सूरमे के निशां अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
          कमबक्खत वक्ति ने दूर किया था जब हमें ।
          फिर मिला देने का झांसा दिया था जब हमें ।
                               उस बुरे वक्ता की पीर अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
          ये तस्सेबुर कि मिले थे हम कभी ।
          महका जाता है मेरी शामों को आज भी ।
                            तू नही ए तेरी यादों के सहारे अभी बाकी है ।
 कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्तु के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
          वो वादे इरादे ए वो आंसूओं की झड़ी ।
         टूट के बिखरती हुई वो बेनी की लड़ी ।
                            किताबों के सूखे फूलों में महक अभी बाकी है ।
 कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्तु के पैरों के निशां अभी बाकी है ।